Sunday, 20 January 2019

सच। .... पहली वजह.


 दूरियों में सिमटे हुए है आज। हम दोनों ही। मैं आज में सिमटा हुआ, और वो अपने कल में। बहुत मुश्किल है उसे मेरे इस वक़्त "आज "में लाना। आखिर कैसे कहूं  की, कल कल है तू एक बार इस आज के लिए आजा न।  मैं हर रोज अपने आप को समझता हूँ की वो बिलकुल सही है उसका सोचना जायज़ है।  मगर मेरा ये दिल सायद नहीं मानता ये ज़िद कर बैठा है। और क्यों न करे लाखों करोडो वज़ह है। मेरे दिल की उसके लिए ज़िद करने की। सच। .... पहली वजह ही काफी है की
         मेरा दिल, क्यों न रेत की तरह रेत के दरिया में बिखर जाये, किसी बारिश की बूंद की तरह किसी बेजान सुखी जमीं पर देहकती हुई गिर जाए।
          पर पहली वजह बिना कुछ मांगे प्यार मुझसे प्यार करना ही रहेगा।
                         
                                   पता है तुम्हे
                                             तुम वही हो जिसकी वजह से ख़्वाब ख़्वाब होते है।
                                           
      तुम वही हो जो बेवक़्त की बारिशों मैं एक नए मौसम एहसास करवाते हो। सच तुम वही हो जो अंधेरो मैं आसानी से मुझे मिल जाते हो।  तुम और कुछ नहीं बस मेरी एक परछाई ही हो।
            

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